उत्तर प्रदेश विद्यालय प्रबन्ध समिति (SMC) पुनर्गठन एवं संचालन निर्देशिका 2026
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महत्वपूर्ण
प्रेषक, पार्थ सारथी सेन शर्मा, अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में, जिलाधिकारी, समस्त जनपद, उत्तर प्रदेश।
बेसिक शिक्षा अनुभाग-5
लखनऊ: दिनांक 05 अगस्त, 2026
विषय: निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011 के अन्तर्गत प्रदेश के गैर-अनुदानित विद्यालयों को छोड़कर समस्त विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति (School Management Committee-SMC) के पुनर्गठन, गठन, संचालन एवं दायित्वों के सम्बन्ध में।
महोदया/महोदय,
उपर्युक्त विषय और आपका ध्यान आकृष्ट कराते हुए अवगत कराना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी, न्यायसंगत, सहभागी एवं उत्तरदायी शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (RTE Act), उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली-2011 तथा समग्र शिक्षा योजना में विद्यालय आधारित विकेन्द्रीकृत शैक्षिक प्रशासन एवं सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व प्रदान किया गया है।
2- विद्यालय प्रबन्ध समिति (SMC) विद्यालय, अभिभावक एवं समुदाय के मध्य एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करती है। यह संस्था विद्यालयों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, सामाजिक सहभागिता, नामांकन, उपस्थिति, अधिगम स्तर सुधार, विद्यालय विकास योजना निर्माण, आधारभूत सुविधाओं के विकास, वित्तीय अनुश्रवण एवं बाल अधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रदेश में वर्तमान में कार्यरत विद्यालय प्रबन्ध समितियों का कार्यकाल दिनांक 30 नवम्बर, 2026 को समाप्त हो रहा है। अतः नवीन विद्यालय प्रबन्ध समितियों का पुनर्गठन…
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…दिनांक 01 नवम्बर, 2026 से 30 नवम्बर, 2026 के मध्य सम्पन्न कराया जाना है, जिससे नवगठित समितियाँ दिनांक 01 दिसम्बर, 2026 से प्रभावी रूप से कार्य प्रारम्भ कर सकें।
3- इस उद्देश्य से पूर्व में निर्गत शासनादेश संख्या 2566/68-5-2022-29/2009 टी०सी० दिनांक 15.11.2022 एवं शासनादेश संख्या-1/795922/2024, 68-5099/462/2024 दिनांक 14.11.2024 को एतद्द्वारा अवक्रमित करते हुए प्रदेश के गैर-अनुदानित विद्यालयों को छोड़कर समस्त विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति (School Management Committee-SMC) के पुनर्गठन, गठन, संचालन एवं दायित्वों के सम्बन्ध में शासन स्तर पर सम्यक् विचारोपरांत निम्नलिखित समेकित एवं संशोधित दिशा-निर्देश निर्गत किये जाने का निर्णय लिया गया है:-
1. उद्देश्य
विद्यालय प्रबन्ध समिति का उद्देश्य विद्यालयों में सामुदायिक स्वामित्व एवं सहभागिता को सुदृढ़ करना तथा प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होगा। समिति निम्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्य करेगी:-
- शत-प्रतिशत नामांकन, उपस्थिति एवं ठहराव सुनिश्चित करना।
- विद्यालय एवं समुदाय के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
- अभिभावकीय सहभागिता को प्रोत्साहित करना।
- विद्यालय विकास योजना तैयार करना एवं उसका अनुश्रवण करना।
- शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में सुधार हेतु सहयोग प्रदान करना।
- विद्यालयों में पारदर्शिता एवं उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करना।
- समावेशी, सुरक्षित एवं बाल-अनुकूल वातावरण विकसित करना।
- बाल अधिकारों एवं बाल संरक्षण को सुनिश्चित करना।
- वित्तीय संसाधनों के पारदर्शी उपयोग का अनुश्रवण करना।
- शासन की विभिन्न शैक्षिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करना।
2. विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन
2.1 गठन
- (क) प्रदेश के समस्त परिषदीय, सहायता प्राप्त, राजकीय, कम्पोजिट, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन किया जायेगा। गैर-अनुदानित विद्यालय इस व्यवस्था से अपवर्जित रहेंगे।
- (ख) समिति का कार्यकाल गठन की तिथि से दो वर्ष का होगा।
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- (ग) कार्यकाल के 23 माह पूर्ण होने पर नई समिति के गठन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जायेगी तथा 24 माह पूर्ण होने से पूर्व नवीन समिति का गठन सुनिश्चित किया जायेगा।
- (घ) आम चुनाव, महामारी, प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों में यदि निर्धारित अवधि में गठन सम्भव न हो, तो स्थिति सामान्य होते ही नवीन समिति का गठन कराया जायेगा तथा तब तक पूर्व समिति कार्य करती रहेगी।
- (ङ) एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों हेतु एक ही विद्यालय प्रबन्ध समिति गठित की जायेगी।
2.2 समिति की संरचना
विद्यालय प्रबन्ध समिति में कुल 15 सदस्य होंगे, जिनमें-
(अ) अभिभावक सदस्य – 11
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के माता-पिता अथवा अभिभावक।
- प्रत्येक कक्षा का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा।
- कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएँ होंगी।
- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जायेगा।
(ब) अन्य सदस्य – 04
- स्थानीय प्राधिकारी का एक निर्वाचित सदस्य (स्थानीय प्राधिकारी द्वारा नामित)।
- एक ए०एन०एम०।
- जिलाधिकारी द्वारा नामित एक लेखपाल।
- प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक (पदेन सदस्य सचिव)।
2.3 अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
- समिति अपने अभिभावक सदस्यों में से अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेगी।
- अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष में से कम से कम एक पद पर महिला का होना अनिवार्य होगा।
3. सदस्य सचिव के दायित्व
प्रधानाध्यापक समिति के सदस्य सचिव के रूप में-
- समिति गठन की प्रक्रिया सम्पन्न करायेंगे।
- बैठकों की सूचना जारी करेंगे।
- कार्यवृत्त पंजिका संधारित करेंगे।
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- वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेख सुरक्षित रखेंगे।
- समिति के निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
- सदस्यों का अभिमुखीकरण एवं क्षमता संवर्धन करायेंगे।
- अभिलेखों का अद्यतन रख-रखाव सुनिश्चित करेंगे।
- प्रत्येक माह में न्यूनतम एक बार विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक आयोजित करायेंगे।
4. विद्यालय प्रबन्ध समिति गठन की प्रक्रिया
4.1 जिला स्तर
- जिलाधिकारी जनपद स्तर पर सम्पूर्ण प्रक्रिया के प्रभारी होंगे।
- प्रत्येक विकासखण्ड हेतु नोडल अधिकारी नामित किये जायेंगे।
- विद्यालयवार खुली बैठक का कैलेंडर तैयार किया जायेगा।
4.2 विकासखण्ड स्तर
- खण्ड शिक्षा अधिकारी व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे।
- प्रत्येक विद्यालय हेतु निर्वाचन पर्यवेक्षक नामित किया जायेगा।
- आवश्यकतानुसार न्याय पंचायतवार कार्यक्रम आयोजित किये जा सकेंगे।
4.3 प्रचार-प्रसार
- मुनादी।
- पम्पलेट।
- बैनर एवं पोस्टर।
- समाचार पत्रों में प्रेस विज्ञप्ति।
- अभिभावकों से व्यक्तिगत सम्पर्क।
4.4 खुली बैठक
- समिति का चयन खुली बैठक में किया जायेगा।
- कुल अभिभावकों में कम से कम 50 प्रतिशत की उपस्थिति आवश्यक होगी।
- सर्वसम्मति का प्रयास किया जायेगा।
- सहमति न बनने पर हाथ उठाकर मत लिया जायेगा।
- विवाद की स्थिति में खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा गोपनीय मतदान कराया जायेगा।
- सम्पूर्ण कार्यवाही बैठक पंजिका में अंकित की जायेगी।
5. सदस्यता समाप्ति एवं रिक्तियों की पूर्ति
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निम्न परिस्थितियों में सदस्यता समाप्त मानी जायेगी-
- मृत्यु।
- न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि।
- स्थायी पलायन।
- लगातार चार बैठकों में बिना सूचना अनुपस्थिति।
- सदस्य के बच्चे का विद्यालय छोड़ देना।
रिक्ति होने पर 50 प्रतिशत कोरम वाली खुली बैठक में नवीन सदस्य का चयन किया जायेगा तथा आवश्यकतानुसार बैंक खाते एवं अभिलेखों में संशोधन कराया जायेगा।
6. विद्यालय प्रबन्ध समिति के कार्य एवं दायित्व
विद्यालय प्रबन्ध समिति (School Management Committee-SMC) विद्यालय आधारित विकेन्द्रीकृत शैक्षिक प्रशासन की एक महत्वपूर्ण इकाई है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा समग्र शिक्षा के प्रावधानों के अनुरूप विद्यालय प्रबन्ध समिति को विद्यालय विकास की आधारभूत इकाई के रूप में परिकल्पित किया गया है। समिति केवल एक औपचारिक संरचना न होकर विद्यालय, अभिभावकों, स्थानीय समुदाय एवं शिक्षा विभाग के मध्य एक सक्रिय साझेदारी का माध्यम है।
विद्यालय प्रबन्ध का दायित्व केवल भौतिक संसाधनों के अनुश्रवण तक सीमित न होकर बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समावेशी वातावरण, सामुदायिक सहभागिता तथा विद्यालय के उत्तरदायी संचालन को सुनिश्चित करना होगा।
6.1 समेकित मानव विकास एवं प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) में सहयोग
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग को बुनियादी अधिगम एवं मानव विकास का सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण माना गया है। अतः विद्यालय प्रबन्ध समिति यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यालय से संबद्ध बालवाटिका एवं पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों के लिए सुरक्षित, पोषणयुक्त, खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित अधिगम वातावरण उपलब्ध हो।
समिति आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं विद्यालयों के मध्य समन्वय स्थापित करने में सहयोग करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यालय में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तत्परता (School Readiness) सम्बन्धी अनुभव प्राप्त हो सके।
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6.2 शत-प्रतिशत नामांकन, उपस्थिति एवं ठहराव सुनिश्चित करना
समिति का प्रथम दायित्व विद्यालय क्षेत्र के प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ना होगा। समिति समुदाय के सहयोग से विद्यालय क्षेत्र का सर्वेक्षण कर ऐसे बच्चों की पहचान करेगी जो विद्यालय से बाहर हैं अथवा नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं।
विशेष रूप से निम्न वर्गों के बच्चों पर ध्यान दिया जायेगा-
- बालिकाएँ
- दिव्यांग बच्चे
- प्रवासी परिवारों के बच्चे
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग
- अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग
- अल्पसंख्यक समुदाय
समिति यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बच्चा सामाजिक, आर्थिक अथवा भौगोलिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।
6.3 निपुण भारत मिशन एवं बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता (FLN)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा निपुण भारत मिशन के अन्तर्गत कक्षा 2 तक के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता विकसित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विद्यालय प्रबन्ध समिति-
- अभिभावकों को FLN के महत्व से अवगत करायेगी।
- घर-विद्यालय अधिगम वातावरण को प्रोत्साहित करेगी।
- नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करेगी।
- बच्चों के अधिगम स्तर की समीक्षा में सहयोग करेगी।
- पठन-पाठन संस्कृति को बढ़ावा देगी।
समिति यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यालय केवल नामांकन केन्द्र न होकर वास्तविक अधिगम का केन्द्र बने।
6.4 गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सुदृढ़ करना
समिति विद्यालय में संचालित शिक्षण-अधिगम गतिविधियों का नियमित अनुश्रवण करेगी। यह देखा जायेगा कि कक्षाएँ नियमित रूप से संचालित हो रही हैं तथा प्रत्येक बच्चा सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सम्मिलित है। विशेष ध्यान निम्न बिन्दुओं पर दिया जायेगा-
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- कक्षा स्तरानुसार अधिगम उपलब्धियाँ
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- पुस्तकालय का उपयोग
- टीएलएम (TLM) का उपयोग
- समूह अधिगम
- परियोजना आधारित अधिगम
- खेल-आधारित शिक्षण
जहाँ आवश्यकता हो वहाँ सुधारात्मक उपाय सुझाये जायेंगे।
6.5 शिक्षक उपस्थिति, उत्तरदायित्व एवं शैक्षिक अनुशासन
विद्यालय प्रबन्ध समिति यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यालय निर्धारित समय पर संचालित हो तथा शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहें। समिति-
- शिक्षक उपस्थिति का सामुदायिक अनुश्रवण करेगी।
- समयपालन को प्रोत्साहित करेगी।
- अभिभावक-शिक्षक संवाद को बढ़ावा देगी।
- विद्यालय में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण बनाए रखने में सहयोग करेगी।
- किसी भी गंभीर अनियमितता की स्थिति में सक्षम अधिकारी को अवगत कराया जायेगा।
6.6 विद्यालय विकास योजना (School Development Plan)
विद्यालय विकास योजना विद्यालय की आवश्यकताओं पर आधारित तीन वर्ष की कार्ययोजना होगी। इसमें निम्न बिन्दुओं का समावेश किया जायेगा-
- नामांकन वृद्धि लक्ष्य
- अधिगम सुधार रणनीति
- शिक्षक आवश्यकता
- अतिरिक्त कक्ष-कक्ष
- पेयजल एवं शौचालय
- डिजिटल संसाधन
- पुस्तकालय विकास
- खेल संसाधन
- समावेशी शिक्षा सम्बन्धी सुविधाएँ
विद्यालय प्रबन्ध समिति योजना के निर्माण, अनुमोदन तथा अनुश्रवण में सक्रिय भूमिका निभायेगी।
6.7 विद्यालय रिपोर्ट कार्ड एवं डेटा आधारित निर्णय
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप समिति विद्यालय रिपोर्ट कार्ड, UDISE+, मूल्यांकन परिणाम तथा अन्य शैक्षिक सूचनाओं की समीक्षा करेगी। समिति-
- विद्यालय की प्रगति का विश्लेषण करेगी।
- उपलब्धियों एवं चुनौतियों की पहचान करेगी।
- सुधार हेतु सुझाव प्रदान करेगी।
- डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देगी।
6.8 आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं रख-रखाव
समिति विद्यालय परिसर की समस्त आधारभूत सुविधाओं का अनुश्रवण करेगी। विशेष रूप से-
- भवन सुरक्षा
- पेयजल
- शौचालय
- विद्युत व्यवस्था
- फर्नीचर
- पुस्तकालय
- खेल मैदान
- डिजिटल सुविधाएँ
- रैम्प एवं दिव्यांग सुविधाएँ
यदि किसी प्रकार की कमी पायी जाती है तो समिति आवश्यक प्रस्ताव सम्बन्धित अधिकारियों को प्रेषित करेगी।
6.9 मध्यान्ह भोजन योजना का अनुश्रवण
समिति यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन प्राप्त हो। अनुश्रवण के प्रमुख क्षेत्र होंगे-
- गुणवत्ता
- मात्रा
- स्वच्छता
- खाद्य सुरक्षा
- रसोईघर व्यवस्था
- पेयजल
- सम्मानजनक वितरण
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6.10 स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता
विद्यालय प्रबन्ध समिति विद्यालय को स्वास्थ्यवर्धक वातावरण प्रदान करने में सहयोग करेगी। समिति-
- स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में सहयोग देगी।
- टीकाकरण कार्यक्रमों को समर्थन देगी।
- पोषण जागरूकता बढ़ायेगी।
- स्वच्छता गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी।
- हाथ धोने एवं स्वच्छ व्यवहार की आदतों को बढ़ावा देगी।
6.11 समावेशी शिक्षा एवं समान अवसर
समिति यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यालय में प्रत्येक बच्चे को समान अवसर प्राप्त हो। विशेष रूप से-
- दिव्यांग बच्चों हेतु सुगम वातावरण
- लैंगिक समानता
- सामाजिक समावेशन
- भेदभाव रहित व्यवहार
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सहयोग
6.12 बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण
विद्यालय प्रबन्ध समिति बाल अधिकारों की संरक्षक संस्था के रूप में कार्य करेगी। समिति सुनिश्चित करेगी कि-
- शारीरिक दण्ड न दिया जाये।
- मानसिक उत्पीड़न न हो।
- लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम हो।
- बाल संरक्षण दिशानिर्देशों का पालन हो।
- शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो।
6.13 अभिभावक एवं समुदाय की सहभागिता
विद्यालय प्रबन्ध समिति समुदाय में विद्यालय के प्रति स्वामित्व की भावना विकसित करेगी। इसके लिए-
- अभिभावक बैठकें
- जनसंवाद
- ग्राम शिक्षा चर्चा
- विद्यालय उत्सव
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- सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किये जा सकेंगे।
6.14 सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit)
समिति विद्यालय में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करेगी। इस हेतु-
- प्राप्त अनुदानों का विवरण सार्वजनिक किया जायेगा।
- व्यय विवरण प्रदर्शित किये जायेंगे।
- कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण किया जायेगा।
- सामाजिक लेखा परीक्षा को प्रोत्साहित किया जायेगा।
6.15 सामुदायिक संसाधनों का उपयोग
विद्यालय प्रबन्ध समिति द्वारा विद्यालय के विकास में स्थानीय/सामुदायिक संसाधनों के उपयोग हेतु निम्नलिखित का सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया जायेगा-
- पूर्व छात्रों का सहयोग।
- स्थानीय विशेषज्ञों का सहयोग।
- समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों अथवा इच्छुक व्यक्तियों का सहयोग।
- सामाजिक संगठनों का सहयोग।
6.16 नवाचार, जीवन कौशल एवं भविष्य उन्मुख शिक्षा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप समिति बच्चों में रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता, सहयोगात्मक अधिगम एवं जीवन कौशलों के विकास को प्रोत्साहित करेगी। विद्यालयों में-
- विज्ञान प्रदर्शनी
- गणित मेले
- खेलकूद
- कला उत्सव
- योग
- पर्यावरण गतिविधियाँ
- पूर्व-व्यावसायिक अनुभव (Pre-vocational Exposure) को बढ़ावा दिया जायेगा।
6.17 शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग
समिति राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करेगी, जिनमें प्रमुख रूप से-
- स्कूल चलो अभियान
- निपुण भारत मिशन
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- समग्र शिक्षा
- बालिका शिक्षा कार्यक्रम
- स्वच्छ विद्यालय अभियान
- स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम
- दिव्यांग समावेशन कार्यक्रम
- डिजिटल शिक्षा पहल सम्मिलित हैं।
7. उप-समितियाँ
उपरोक्त दायित्वों के प्रभावी निर्वहन हेतु विद्यालय प्रबन्ध समिति द्वारा आवश्यकतानुसार उप-समितियाँ गठित की जा सकेंगी। उदाहरण के लिए-
- शैक्षिक गुणवत्ता उप-समिति।
- अवस्थापना सुविधा उप-समिति।
- बाल सुरक्षा एवं सम्प्रेषण उप-समिति।
- मध्यान्ह भोजन अनुश्रवण उप-समिति।
- सामुदायिक सहभागिता उप-समिति आदि।
8. विद्यालय विकास योजना (School Development Plan)
- प्रत्येक समिति वित्तीय वर्ष समाप्त होने से कम से कम तीन माह पूर्व त्रिवर्षीय विद्यालय विकास योजना तैयार करेगी।
- प्रत्येक वर्ष हेतु पृथक वार्षिक कार्ययोजना बनाई जायेगी।
- कक्षावार नामांकन का आकलन किया जायेगा।
- शिक्षक आवश्यकता का निर्धारण किया जायेगा।
- आधारभूत संरचना आवश्यकताओं का आकलन किया जायेगा।
- विशेष प्रशिक्षण एवं अन्य वित्तीय आवश्यकताओं का समावेश किया जायेगा।
- योजना अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्य सचिव द्वारा हस्ताक्षरित होगी।
9. वित्तीय प्रबंधन
- विद्यालय प्रबन्ध समिति का एक बैंक खाता संचालित होगा।
- अध्यक्ष एवं सदस्य सचिव संयुक्त हस्ताक्षरकर्ता होंगे।
- अभिलेखों का रख-रखाव प्रधानाध्यापक करेंगे।
- सभी व्यय PFMS एवं SNA/SNA SPARSH व्यवस्था के अनुरूप किये जायेंगे।
- समस्त लेखों का वार्षिक संपरीक्षण कराया जायेगा।
विद्यालय प्रबन्ध समिति के माध्यम से निम्न कार्य सम्पादित किये जायेंगे-
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- निर्माण कार्य।
- मरम्मत एवं अनुरक्षण।
- कम्पोजिट विद्यालय अनुदान।
- शिक्षक अनुदान।
- अन्य स्वीकृत कार्य।
10. विद्यालय निर्माण कार्य सम्बन्धी व्यवस्था
- रु० 30 लाख तक की लागत वाले सभी निर्माण कार्य विद्यालय प्रबन्ध समिति द्वारा अवस्थापना सुविधा उपसमिति के माध्यम से कराये जा सकते हैं।
- उक्त उप समिति चार सदस्यीय होगी।
- समिति में अध्यक्ष, दो अभिभावक सदस्य तथा एक पदेन शासकीय सदस्य होगा।
- निर्माण सामग्री का क्रय न्यूनतम तीन सदस्यों की उपस्थिति में किया जायेगा।
- गुणवत्ता का प्रमाणन किया जायेगा।
- सम्पत्ति रजिस्टर एवं स्टॉक रजिस्टर अद्यतन रखे जायेंगे।
- निर्माण कार्यों का निरीक्षण खण्ड शिक्षा अधिकारी एवं बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा कराया जायेगा।
- आवश्यकता होने पर जिलाधिकारी द्वारा तकनीकी जांच करायी जा सकती है।
11. प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन
- यथा संभव गठन के एक माह के भीतर सभी सदस्यों का अभिमुखीकरण प्रशिक्षण आयोजित किया जायेगा।
- समय-समय पर पुनर्बोधन एवं क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
- प्रशिक्षण में RTE, NEP-2020, NIPUN Bharat, वित्तीय प्रबन्धन, बाल संरक्षण एवं विद्यालय विकास योजना से सम्बन्धित विषय सम्मिलित किये जायेंगे।
12. पुनर्गठन कार्यक्रम, 2026
- वर्तमान समितियों का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2026 को समाप्त होगा।
- नवीन समितियों का गठन 01 नवम्बर, 2026 से 30 नवम्बर, 2026 तक सम्पन्न कराया जायेगा।
- नवगठित समितियाँ 01 दिसम्बर, 2026 से कार्यभार ग्रहण करेंगी।
- सम्पूर्ण प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से सम्पन्न करायी जायेगी।
- जिलाधिकारी द्वारा सम्पूर्ण प्रक्रिया का अनुश्रवण सुनिश्चित किया जायेगा।
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4 – अतः इस संबंध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि कृपया शासन द्वारा लिये गये उपर्युक्त निर्णयों का प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित कराने का कष्ट करें, जिससे विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन पारदर्शी एवं निष्पक्ष रूप से हो सके।
भवदीय,
(डिजिटली हस्ताक्षरित)
(पार्थ सारथी सेन शर्मा)
अपर मुख्य सचिव।
संख्या व दिनांक तदैव।
प्रतिलिपि: निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
- मण्डलायुक्त, समस्त मण्डल, उ०प्र०।
- महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उ०प्र०, लखनऊ।
- राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उ०प्र० लखनऊ।
- मुख्य विकास अधिकारी, समस्त जनपद, उ०प्र०।
- शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश लखनऊ।
- निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उ०प्र० लखनऊ।
- शिक्षा विशेषज्ञ एवं एस०बी०सी० अधिकारी, यूनिसेफ, उ०प्र०।
- सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज।
- प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, समस्त जनपद, उ०प्र०।
- मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), समस्त मण्डल, उ०प्र०।
- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, समस्त जनपद, उ०प्र०।
- गार्ड फाईल।
आज्ञा से,
ह०/-
(अवधेश कुमार तिवारी)
विशेष सचिव।




