लर्निंग कार्नर अपग्रेड

यूपी के 54 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में सजेंगे ‘लर्निंग कॉर्नर’: जानें क्या है नई योजना और कैसे बदलेगी बच्चों की दुनिया!

उत्तर प्रदेश के बुनियादी शिक्षा ढांचे को मजबूत करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के सपनों को साकार करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय, लखनऊ द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश (पत्रांक: प्री-प्राइमरी / Learning Corners / 3475 / 2026-27) जारी किया गया है।

इस योजना के तहत प्रदेश के 54,109 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों/बालवाटिकाओं में बच्चों के समग्र विकास के लिए ‘लर्निंग कॉर्नर’ (सीखने के कोने) को अपग्रेड और अपडेट किया जाएगा। आइए जानते हैं कि इस योजना में क्या खास है और यह हमारे नौनिहालों के भविष्य को कैसे संवारेगी।


लर्निंग कॉर्नर (Learning Corner) क्या है?

लर्निंग कॉर्नर विद्यालय परिसर में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों या बालवाटिकाओं में बनाया जाने वाला एक ऐसा विशेष कोना (प्ले एरिया) होता है, जहाँ बच्चे खेल-खेल में रचनात्मकता, भाषा, गणित और सामाजिक कौशल सीखते हैं। इस योजना के तहत प्रत्येक केंद्र में 4 मुख्य कॉर्नर विकसित किए जाएंगे:

  1. रीडिंग कॉर्नर (Reading Corner – पठन कोना): बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए यहाँ सुरुचिपूर्ण चटाई, स्लेट (10 पीस), आयु-अनुकूल चित्र पुस्तकें, कहानियां और हस्तनिर्मित बुकमार्क जैसी सामग्रियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
  2. आर्ट कॉर्नर (Art Corner – कला कोना): बच्चों की रचनात्मकता को पंख देने के लिए रंगीन A4 पेपर शीट्स, क्रेयॉन (मोम के रंग), क्ले (मिट्टी) और विभिन्न आकृतियों के मोल्ड, ड्राइंग बोर्ड/क्लिपबोर्ड और साफ सफेद तौलिये उपलब्ध होंगे।
  3. ब्लॉक कॉर्नर (Block Corner – ब्लॉक कोना): समस्या समाधान और तार्किक सोच विकसित करने के लिए प्लास्टिक के नंबर सेट, विभिन्न रंगों और आकारों के ब्लॉक्स, पिक्चर पजल्स (चित्र पहेलियां) और बच्चों के खेलने वाले हथौड़े-पेचकस जैसे खिलौने दिए जाएंगे।
  4. परफॉर्मेंस कॉर्नर (Performance Corner – अभिनय कोना): बच्चों की कल्पनाशक्ति और सामाजिक समझ बढ़ाने के लिए रोल-प्ले की पोशाकें, हाथ और उंगलियों में पहनने वाली पपेट (कठपुतलियां), किचन सेट, डॉक्टर सेट, वेजिटेबल सेट और भारतीय मुद्रा की डमी किट उपलब्ध कराई जाएगी।

वित्तीय प्रावधान (Budget Target)

इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र/बालवाटिका युक्त स्कूल को ₹5,000/- की वित्तीय सीमा (बजट) स्वीकृत की गई है। कुल 54,109 केंद्रों के लिए ₹2705.45 लाख का बजट जारी किया जा रहा है। यह पूरी राशि SNA-SPARSH पोर्टल के माध्यम से सीधे विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के बैंक खाते में भेजी जाएगी।


पारदर्शिता के लिए गठित होगी ‘क्रय समिति’

सामग्रियों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक स्कूल स्तर पर एक 4-सदस्यीय क्रय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:

  • अध्यक्ष: विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के अध्यक्ष।
  • सदस्य सचिव: विद्यालय के प्रधानाध्यापक या इंचार्ज अध्यापक।
  • सदस्य: संबंधित क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकत्री।
  • सदस्य: प्री-प्राइमरी से जुड़े विद्यालय के नोडल अध्यापक।

अधिकारियों और शिक्षकों के प्रमुख दायित्व

  • प्रधानाध्यापक के दायित्व: खरीदी गई सभी सामग्रियों की प्रविष्टि स्कूल के स्टॉक रजिस्टर में की जाएगी और इसकी एक प्रति आंगनबाड़ी कार्यकत्री को सौंपी जाएगी। साथ ही, प्रधानाध्यापक नोडल अध्यापक और आंगनबाड़ी कार्यकत्री के साथ मिलकर इस कार्य को समय से पूरा कराएंगे।
  • जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA): बजट की लिमिट मिलते ही 1 सप्ताह के भीतर इसे SMC खातों में ट्रांसफर करना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, प्रोग्रेस रिपोर्ट को ‘प्रेरणा पोर्टल’ पर DCF के माध्यम से अपलोड कराएंगे।
  • शत-प्रतिशत सत्यापन (100% Verification): जिला स्तर पर जिला समन्वयक (प्रशिक्षण/निपुण), नोडल SRG और डायट मेंटर की एक विशेष टीम द्वारा खरीदी गई खेल और शिक्षा सामग्रियों का 100% भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
  • डायट (DIET) और रिसोर्स सेंटर: मासिक बैठकों में इसकी समीक्षा करेंगे और रिसोर्स सेंटर की 3-सदस्यीय टीम आवश्यक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करेगी।

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