Summer Camp 2026

उत्तर प्रदेश शासन ने परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 13–19 मई 2026 तक ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर’ आयोजित करने का आदेश जारी किया है। इस शिविर का उद्देश्य बहुभाषावाद, संवाद कौशल और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है, जिसमें पहली बार भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) भी शामिल की गई है।


📜 शासनादेश के मुख्य बिंदु

  • अवधि: 13 मई से 19 मई 2026 (एक सप्ताह)

  • समय: प्रतिदिन 2 घंटे की गतिविधियाँ

  • शुभारंभ: 13 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा

  • विद्यालय: सभी परिषदीय विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV)

  • निगरानी: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारी, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक


🎯 उद्देश्य

  • छात्रों को मातृभाषा के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं से परिचित कराना।

  • बहुभाषावाद और संवाद कौशल को आनंदमय तरीके से विकसित करना।

  • भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) के माध्यम से समावेशिता और संवेदनशीलता बढ़ाना।

  • बच्चों में शब्दावली निर्माण, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक विविधता की समझ विकसित करना।


📌 कार्यक्रम की गतिविधियाँ

  • पहला दिन: अभिवादन, सामान्य बोलचाल, वर्णमाला, संख्याएँ, हस्ताक्षर

  • दूसरा दिन: रास्ता पूछना, खरीदारी, यातायात नियम

  • तीसरा दिन: संगीत, नृत्य, चित्रकला

  • चौथा दिन: स्थानीय व्यंजन, मसाले, सब्जियों और फलों के नाम

  • पाँचवाँ दिन: स्वतंत्रता सेनानी, स्थानीय नायक और कलाकार

  • छठा दिन: नदियाँ, पर्वत, ऐतिहासिक स्थल

  • सातवाँ दिन: पारंपरिक खेल, अंत्याक्षरी, टंग ट्विस्टर, समापन समारोह


🛠 कार्यान्वयन और संसाधन

  • भाषा चयन: विद्यालय स्थानीय जरूरत और उपलब्ध भाषा शिक्षकों के अनुसार भाषा चुनेंगे।

  • सहयोग: स्थानीय NGOs और DIET का सहयोग लिया जाएगा।

  • सामग्री: SCERT उत्तर प्रदेश द्वारा PM e-Vidya चैनल के माध्यम से ISL की शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

  • व्यय: शिविर का खर्च विद्यालय की कंपोजिट ग्रांट से किया जाएगा।


⚠️ ध्यान देने योग्य बातें

  • शिविर का संचालन अनिवार्य रूप से सभी परिषदीय विद्यालयों में किया जाएगा।

  • शिविर की गतिविधियों का डॉक्यूमेंटेशन (फोटो/वीडियो) कर राज्य परियोजना कार्यालय को भेजना होगा।

  • यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जिसमें भाषाई विविधता और समावेशी शिक्षा पर जोर दिया गया है।


 

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