सेवा में,
1-प्राचार्य
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान
समस्त जनपद, उ०प्र० ।
2-जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी,
समस्त जनपद, उ०प्र० ।
पत्रांकः गुण०वि०/एल०ई०पी० रिमीडियल / 11387/2024-25 दिनांकः 29 मार्च, 2025
उपचारात्मक शिक्षण शासनादेश 11387_27 Mar 2025 Download
विषयः- समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में रिमीडियल शिक्षण कार्यकम आयोजित किये जाने के संबंध में।
महोदय / महोदया,
अवगत कराना है कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020” में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर रचनात्मक एवं अनुकूलित मूल्यांकन की प्रभावी प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक छात्र-छात्रा के अधिगम स्तर की सतत् निगरानी पर बल दिया गया है। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर किये जाने वाले विभिन्न सर्वेक्षणों / अध्ययनों यथा-NAS, ASER आदि के परिणामों के अनुसार विभिन्न कारणों से छात्र-छात्राओं में कक्षानुरूप अपेक्षित अधिगम स्तर के सापेक्ष लर्निंग गैप देखा जाता है। इस लर्निंग गैप के कारण छात्र-छात्राओं के लिए आगामी कक्षा में पाठ्यक्रम के साथ सामंजस्य बनाये रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसी स्थिति में इन छात्र-छात्राओं की विद्यालय में उपस्थिति भी प्रभावित होती है।
2-छात्र-छात्राओं को कक्षावार एवं विषयवार निर्धारित दक्षताओं की प्राप्ति हेतु यह आवश्यक है कि शिक्षण कार्य एवं विभिन्न अकादमिक गतिविधियों का योजनाबद्ध ढंग से प्रभावी कियान्वयन किया जाये। उक्त के दृष्टिगत आगामी शैक्षिक सत्र 2025-26 के सत्रारम्भ में समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कक्षा 2-8 के छात्र-छात्राओं के लर्निंग गैप को कम करने के लिये रिमीडियल कक्षा-शिक्षण प्रारम्भ किये जाने का निर्णय लिया गया है।
3-एन०सी०ई०आर०टी० द्वारा विकसित कक्षा-1 के छात्र-छात्राओं के लिए 03 माह के खेल-आधारित ‘स्कूल तैयारी मॉड्यूल’ (विद्याप्रवेश) के आलोक में राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं के दृष्टिगत एस०सी०ई०आर०टी० द्वारा स्कूल तैयारी मॉड्यूल का विकास किया गया है। यह मॉड्यूल गतिविधि एवं खेल के माध्यम से अधिगम लक्ष्यों को प्राप्त कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। माह अप्रैल, 2025 से 12 सप्ताह का स्कूल तैयारी मॉड्यूल (विद्या प्रवेश) के आधार पर कक्षा-1 में नवप्रवेशित बच्चों का शिक्षण कार्य किया जायेगा।4-समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रभावी रिमीडियल शिक्षण गतिविधियों के संचालन हेतु निम्नवत् निर्देशित किया जाता है:-
1) शैक्षिक सत्र 2025-26 के सत्रारम्भ में समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 03 सप्ताह का रिमीडियल शिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाये।
2) शिक्षण योजना : छात्र-छात्राओं के सीखने के स्तर, रूचि, समझ, दक्षताओं, सीखने की प्रक्रिया आदि के लिये अवलोकन / पर्यवेक्षण एक महत्वपूर्ण तकनीक है। अतः प्रत्येक छात्र-छात्रा के सीखने के स्तर का अवलोकन एवं आकलन करके शिक्षक द्वारा शिक्षण योजना बनायी जाये। इसके लिये बहुआयामी रणनीति तथा समग्र व समावेशी प्रयास की आवश्यकता है, यथा-गतिविधि आधारित शिक्षण, समूह कार्य, पियर लर्निंग, प्रोजेक्ट कार्य एवं आई०सी०टी० तकनीक का प्रयोग आदि।
3) बेसलाइन आकलनः रिमीडियल शिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत कक्षा 2-8 में अध्ययनरत समस्त छात्र-छात्राओं का हिन्दी, गणित, अंग्रेजी एवं हमारा परिवेश/विज्ञान तथा सामाजिक अध्ययन विषयों में फॉरमेटिव एसेसमेण्ट (बेसलाइन निर्धारण हेतु) करते हुये वास्तविक अधिगम स्तर ज्ञात किया जाये। बेसलाइन आकलन हेतु गत कक्षा की विषयवार दक्षताओं पर आधारित प्रश्न पूर्व में ही तैयार कर लिये जायें। सुलभ संदर्भ हेतु सुझावात्मक प्रश्न ध्यानाकर्षण मॉड्यूल में उल्लिखित हैं। यह अवश्य ध्यान रखा जाये कि प्रश्न-पत्र में पूर्व की कक्षा के मुख्य लर्निंग आउटकम से संबंधित प्रश्न ही पूछे जायें।
4) परिणामों की समीक्षाः शिक्षकों द्वारा दिनांक 5 अप्रैल 2025 तक कक्षा 2-8 में अध्ययनरत समस्त विद्यार्थियों का हिन्दी, गणित, अंग्रेजी एवं हमारा परिवेश/विज्ञान तथा सामाजिक अध्ययन विषयों में वास्तविक अधिगम स्तर ज्ञात किया जाये। दिनांक 08 अप्रैल 2025 तक बेसलाइन आकलन के परिणामों की समीक्षा शिक्षक द्वारा स्वयं की जाये तथा प्रत्येक छात्र-छात्रा के वास्तविक अधिगम स्तर को निपुण तालिका में अंकित किया जाये अथवा स्वयं के संदर्भ हेतु नोट किया जाये। यह मात्र शिक्षक के उपयोगार्थ है।
5) अधिगम दक्षताओं की सूचीः बेसलाइन आकलन के परिणामों के आधार पर आगामी 03 सप्ताह तक कार्य करने हेतु अधिगम दक्षताओं की सूची प्रत्येक दशा में दिनांक 10 अप्रैल 2025 तक तैयार कर ली जाये। उक्त सूची के अनुरूप शिक्षकों द्वारा शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का संचालन किया जाये।जाये। उक्त सूची के अनुरूप शिक्षकों द्वारा शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का संचालन किया जाये।
6) शिक्षण सामग्री का प्रयोगः विद्यालयों में कक्षा-कक्ष का वातावरण सुधारने एवं आकर्षक बनाने के लिये राज्य स्तर से पाठ्यपुस्तकों एवं कार्यपुस्तिकाओं के अतिरिक्त उपलब्ध करायी गयी विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक सामग्री यथा-संदर्शिका, प्रिंटरिच सामग्री, तालिका, लाइब्रेरी बुक्स एवं मैथ्स किट आदि उपलब्ध कराये गये हैं। उक्त के साथ ही शिक्षकों को टी०एल०एम० विकसित किये जाने हेतु धनराशि भी प्रेषित की गयी है। अतः शिक्षण अधिगम प्रकिया में खेल, खोज और गतिविधि आधारित शिक्षण को सम्मिलित करके कक्षा-कक्ष में समावेशी तथा आनन्दमय वातावरण सृजित किया जाये।
7) रिमीडियल शिक्षण के दौरान शिक्षक द्वारा दैनिक / साप्ताहिक योजना बनाकर शिक्षण कार्य कराया जाये। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं का प्रत्येक सप्ताह फॉरमेटिव एसेसमेण्ट (Formative Assessment) कर उनका अधिगम स्तर ज्ञात करते हुए आवश्यकतानुसार अनुसमर्थन प्रदान किया जाये।
8) नियमित अनुसमर्थनः सपोर्टिव सुपरविजन के दौरान एस०आर०जी०/ए०आर०पी०/ डायट मेन्टर द्वारा रिमीडियल शिक्षण पर शिक्षकों के साथ चर्चा की जाये। इसके साथ ही बेहतर रिमीडियल शिक्षण हेतु यथावश्यक सुझाव एवं कक्षा कक्ष में मॉडल टीचिंग का प्रदर्शन भी किया जाये।
9) कार्यक्रम अवधिः ‘आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका’ एवं ‘ध्यानाकर्षण’ आदि में वर्णित शिक्षण गतिविधियों के अनुसार माह अप्रैल, 2025 में रिमीडियल कक्षाओं का संचालन किया जाये। छात्र-छात्राओं को अधिकाधिक अभ्यास के अवसर दिये जायें तथा उपलब्ध कार्यपुस्तिकाओं एवं अभ्यास पत्रकों का प्रयोग किया जाये।
10) अभिभावक-शिक्षक बैठकः बेसलाइन आकलन में छात्र-छात्राओं के परिणामों को सारांश रूप में अभिभावक-शिक्षक बैठक में साझा किया जाये। बैठक में अभिभावकों को आगामी कार्य दिवसों में रिमीडियल शिक्षण के संबंध में जानकारी दी जाये तथा अभिभावकों को प्रेरित किया जाये कि वे अपने बच्चों को घर पर अध्ययन करने एवं विद्यालय द्वारा दिये गये गृहकार्य को पूर्ण करने हेतु प्रोत्सहित करें। इसके साथ ही अपने बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने के लिये अभिभावकों को निरन्तर प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जाये तथा समय-समय पर शिक्षकों द्वारा गृह भ्रमण भी किये जायें।
11) एंडलाइन आकलनः रिमीडियल शिक्षण कार्यक्रम के संचालन के पश्चात् छात्र-छात्राओं के अधिगम स्तर में हुए सुधार को जानने के लिए शिक्षक द्वारा बेसलाइन आकलन के समान ही दिनांक 28 से 30
अप्रैल, 2025 के मध्य एंडलाइन आकलन भी किया जाये तथा अधिगम स्तर में हुये अपेक्षित सुधार को दर्ज किया जाये।
12) अतिरिक्त अनुसमर्थनः रिमीडियल शिक्षण के सफल संचालन के पश्चात् कक्षा स्तरीय पाठ्यक्रम एवं12) अतिरिक्त अनुसमर्थनः रिमीडियल शिक्षण के सफल संचालन के पश्चात् कक्षा स्तरीय पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों के आधार पर कक्षा-शिक्षण कराया जाये। यदि रिमीडियल शिक्षण कार्यक्रम के उपरान्त भी छात्र-छात्राओं का अधिगम स्तर पिछली कक्षा के अधिगम स्तर के अनुरूप नहीं है, तो उन्हें नियमित कक्षा-शिक्षण प्रक्रिया के दौरान यथावश्यकतानुसार अतिरिक्त अनुसमर्थन प्रदान किया जाये।
13) परिणामों का विश्लेषणः शिक्षकों द्वारा बेसलाइन आकलन के सापेक्ष एंडलाइन आकलन में छात्र-छात्राओं के अधिगम स्तर में हुए सुधार का विश्लेषण किया जाये तथा प्राप्त परिणामों को अभिभावक-शिक्षक बैठक में साझा किया जाये।
14) अनुश्रवण जनपद/ब्लॉक / संकुल स्तर पर आयोजित समस्त बैठकों में ‘आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका’ एवं ‘ध्यानाकर्षण’ हस्तपुस्तिका के सहयोग से रिमीडियल शिक्षण पर विशेष रूप से चर्चा की जाये तथा प्रभावी कियान्वयन हेतु प्रभावी रणनीति तैयार की जाये। विद्यालयों में रिमीडियल शिक्षण के प्रभावी संचालन हेतु प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खण्ड शिक्षा अधिकारी एवं जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) द्वारा एस०आर०जी०, ए०आर०पी० एवं शिक्षक संकुल को अकादमिक अनुसमर्थन / निर्देश प्रदान किये जायें तथा सघन अनुश्रवण / पर्यवेक्षण भी सुनिश्चित किया जाये।
उपर्युक्तानुसार जनपद के समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का संचालन सुनिश्चित करने के लिये अपने स्तर से भी सर्वसंबंधित को निर्देशित करना सुनिश्चित करें।
भवदीया,
(कंचन वर्मा) महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश।
पृ०सं०ः गुण०वि०/एल०ई०पी० रिमिडियल / 11385/20 /2024-25 तददिनांक।